ज्योतिष शब्दावली
वैदिक ज्योतिष की मुख्य शब्दावली को सरल हिंदी में समझें
कुंडली (Kundali)
जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का चार्ट। इसे जन्म पत्री, जातक या होरोस्कोप भी कहते हैं। यह 12 भावों में बंटी होती है।
लग्न (Lagna/Ascendant)
जन्म के समय पूर्व दिशा में उगने वाली राशि। यह कुंडली का प्रथम भाव है और व्यक्तित्व, स्वास्थ्य व जीवन की दिशा निर्धारित करता है। लग्न लगभग हर 2 घंटे में बदलता है।
राशि (Rashi/Moon Sign)
चंद्रमा जिस राशि में हो, वह आपकी राशि कहलाती है। भारतीय ज्योतिष में राशि का विशेष महत्व है। कुल 12 राशियां हैं - मेष से मीन तक।
नक्षत्र (Nakshatra)
चंद्रमा जिस तारा समूह में हो, वह आपका जन्म नक्षत्र है। कुल 27 नक्षत्र हैं। प्रत्येक नक्षत्र के 4 पाद (चरण) होते हैं। नाम राशि नक्षत्र से ही निकलती है।
अयनांश (Ayanamsa)
सायन और निरयन राशि चक्र के बीच का अंतर। भारतीय ज्योतिष निरयन पद्धति का उपयोग करता है। लाहिरी अयनांश सबसे प्रचलित है और सरकारी पंचांग में भी इसी का उपयोग होता है।
द्रिक गणित (Drik Ganita)
खगोलीय गणना पद्धति जो ग्रहों की वास्तविक स्थिति पर आधारित है। आधुनिक कंप्यूटर और Swiss Ephemeris इसी का उपयोग करते हैं। यह वाक्य गणित से अधिक सटीक है।
वाक्य गणित (Vakya Ganita)
पारंपरिक तालिका आधारित पद्धति जो प्राचीन संस्कृत ग्रंथों पर आधारित है। कुछ पंडित आज भी इसका उपयोग करते हैं, लेकिन द्रिक गणित अधिक सटीक माना जाता है।
भाव (Bhava/House)
कुंडली के 12 घर या स्थान। प्रत्येक भाव जीवन के विभिन्न पहलुओं को दर्शाता है - जैसे प्रथम भाव स्वयं, सप्तम भाव विवाह, दशम भाव करियर।
गुण मिलान (Guna Milan)
विवाह के लिए वर-वधू की कुंडली मिलान। अष्टकूट पद्धति में 8 कूट और 36 गुण होते हैं। 18+ गुण शुभ माने जाते हैं।
नाड़ी दोष (Nadi Dosha)
गुण मिलान में सबसे गंभीर दोष। जब वर-वधू की नाड़ी एक हो तो यह दोष बनता है। इसे 8 गुण का नुकसान होता है। संतान और स्वास्थ्य पर प्रभाव माना जाता है।
भकूट दोष (Bhakoot Dosha)
वर-वधू की राशियों के बीच 6-8 या 12-2 का संबंध होने पर यह दोष बनता है। यह भावनात्मक संगति को प्रभावित करता है।
मांगलिक दोष (Manglik Dosha)
जब मंगल ग्रह कुंडली के 1, 4, 7, 8 या 12 भाव में हो तो मांगलिक दोष माना जाता है। विवाह में देरी या कठिनाई का संकेत। कई नियमों से यह दोष निरस्त भी हो जाता है।
आंशिक मांगलिक (Partial Manglik)
जब मंगल दोष पूरी तरह प्रभावी न हो या अन्य ग्रहों की दृष्टि/युति से कमजोर हो जाए। ऐसे में दोष का प्रभाव सीमित होता है।
कुंभ विवाह (Kumbh Vivah)
मांगलिक दोष के उपाय के रूप में किया जाने वाला पारंपरिक विवाह। पहले विष्णु मूर्ति, पीपल या केले के पेड़ से विवाह किया जाता है।
कालसर्प दोष (Kalsarpa Dosha)
जब सभी ग्रह राहु-केतु के बीच एक ओर हों। यह 12 प्रकार का होता है। जीवन में अचानक उतार-चढ़ाव का संकेत।
सूर्योदय समय (Sunrise Time)
वैदिक ज्योतिष में तिथि का निर्धारण सूर्योदय से होता है। जन्म स्थान का सूर्योदय समय पंचांग गणना के लिए महत्वपूर्ण है।
उदय तिथि (Udaya Tithi)
सूर्योदय के समय जो तिथि हो, वह उस दिन की तिथि मानी जाती है। यह भारतीय पंचांग की मूल अवधारणा है।
योग (Yoga)
सूर्य और चंद्रमा की स्थिति से बनने वाला शुभ-अशुभ योग। पंचांग में 27 योग होते हैं। कुंडली में ग्रहों के संयोग से भी विभिन्न योग बनते हैं जैसे गजकेसरी, राजयोग आदि।
करण (Karana)
तिथि का आधा भाग। एक तिथि में दो करण होते हैं। कुल 11 करण हैं - 4 स्थिर और 7 चर। मुहूर्त में करण का विचार किया जाता है।
दशा (Dasha)
ग्रह काल या ग्रह की अवधि। विंशोत्तरी दशा सबसे प्रचलित है जो 120 वर्ष की होती है। प्रत्येक ग्रह की दशा में उस ग्रह का विशेष प्रभाव रहता है।
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